जिस प्रकार एक छोटी सी जल की धारा नदी में मिलती है, और वह बड़ी नदी समुंदर में मिलती है, इसी प्रकार हमारी मृत्यु के पश्चात हमारी आत्मा, सर्वत्र विद्यमान आत्मा से मिल जाती है। मृत्यु के बाद यह शरीर भी जिन पांच तत्वों से मिलकर बना है – धरती, जल, वायु, अग्नि, आकाश, उन्ही पांच तत्वों में विलीन हो जाता है। पर हमारा सूक्ष्म शरीर – मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार, पुनर्जन्म लेता है। पुनर्जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति पाना ही हमारे जीवन का परम उद्देश्य है। पर अविद्या के कारण हम इस सच का एहसास नहीं करते। हम प्रश्न भी नहीं पूछते। अगर हम जीते जी सच का एहसास नहीं करेंगे, तो क्या मरने के बाद करेंगे? यह हमारे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य है और हमें इसका ज्ञान करना है।
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كتاب صوتي: 15 نوفمبر 2022
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