3.6
أدب الجريمة
डमरू विनाश और विंध्वस का प्रतीक है. भगवान शंकर को जब सृष्टि की रचना करनी होती है या विनाश करना होता है, वो डमरू बजाते हैं. वो कहते हैं अब सारी कमान मेरे हाथ में है. डमरूवाले के हाथ में! पहले भी बता चुका हूँ, 'सारा खेल भरा है मुझमें' ! मौत का वो सारा खेल जिससे अब तुम्हें रु-ब-रु होना है. तो दोस्तों बिसात बिछ चुकी है, ठीक वैसी ही बिसात जैसी शतरंज के खेल में बिछती है. मैं अपनी चाल चलूँगा और तुम्हें अपनी चाल चलनी है! मगर कौन है असली 'डमरू वाला'? जानिए वेद प्रकाश शर्मा के इस थ्रिलिंग उपन्यास में! ऑडियो में ये उपन्यास किसी फ़िल्म के चित्रण जैसा है, जहाँ दर्शक की आँखें ठहरी होती हैं!
© 2021 Storyside IN (كتاب صوتي): 9789353987398
تاريخ النشر
كتاب صوتي: 26 نوفمبر 2021
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