วรรณกรรมเยาวชน
मुंशी प्रेमचंद ने इस नाटक में किसानों के संघर्ष का सजीव चित्रण किया है। इस नाटक में लेखक ने पाठकों का ध्यान किसान की उन कुरीतियों और फिजूल-खर्चियों की ओर दिलाने की कोशिश की है जिसके कारण वह सदा कर्जे के बोझ से दबा रहता है। और जमींदार और साहूकार से लिए गए कर्जे का सूद चुकाने के लिए उसे अपनी फसल मजबूर होकर औने-पौने दाम में बेचनी पड़ती है।
© 2026 True Sign Publishing House (อีบุ๊ก): 9789376149247
วันเปิดตัว
อีบุ๊ก: 1 มกราคม 2569
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